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यमुना मिशन (संस्थापक) - श्री Pradeep Bansal YM
Girish vikani जी की पोस्ट
श्री अन्नपूर्णा देवी जी की आरती ||
...बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम ..
जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥ बारम्बार ..
प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम।
सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥ बारम्बार ..
चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम।
चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥ बारम्बार..
देवि देव! दयनीय दशा में दया-दया तब नाम।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल शरण रूप तब धाम॥ बारम्बार..
श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या श्री क्लीं कमला काम।
कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी, वर दे तू निष्काम॥ बारम्बार.
यमुना मिशन (संस्थापक) - श्री Pradeep Bansal YM
बृज चौरासी कोस यात्रा (पड़ाव - श्री मथुरा )
यह वही नगरी है जहाँ अखिल ब्रह्माण्डनायक श्रीकृष्ण कारागार में अपनी अद्भुत रूप-छटा दिखलाकर इस धरा-धाम को सुशोभित करने के लिए प्रकट हुए। यहाँ की वीथियों में, उद्यानों में, विशाल बाजारों में श्रीकृष्ण तथा बलराम विचरण करते रहे हैं। उनकी रूप मधुरिमा से पूर्णतः अवगत मथुरा की स्त्रियाँ बड़ी आतुरी से उनकी छवि माधुरी
का पान करती रही हैं।
श्रीकृष्ण मथुरा में पधार रहे हैं यह जानकर चकित विस्मित-सी ये पुरस्त्रियाँ एक उन्माद में भरी बावरी-सी अटपटा भंगार किये अपने घर के कृत्यों को ज्यों का त्यौं छोड़ अपनी-अपनी अट्टारियों पर आ विराजी थीं। श्रीलक्ष्मीजी को आनन्दित करने वाले इन श्यामसुन्दर की श्यामल
सुषमा को निहार चंचल चितवन तथा मुस्कान मधुरिमा का पान कर,
यह मथुरावासिनी युवतियाँ अपनी प्रणय-पगी भावनाओं के वशीभूत
हुईं, नेत्रों द्वारा भगवान् को अपने हृदय में ले जाकर उनके आनन्दमय स्वरूप का आलिंगन कर अपनी युग-युगों की पिपासा का शमन करती रही हैं। यही नहीं, यहाँ की प्रत्येक स्थली श्रीकृष्ण चरणांकों से चिन्हित है। उनकी विविध क्रीड़ाओं से संश्लिष्ट है, उनकी विविध लीलाओं से ओत-प्रोत है। ।
शेष अगली पोस्ट में.......
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