May 24, 2017

ताज़ा खबर

 

चौपाल

ईरान की अहमियत

ईरान में हाल ही हुए चुनाव में हसन रूहानी का दोबारा चुना जाना भारत और विश्व के लिए कई मायने में अहम है।

ईमानदारी का जोखिम

कुछ हिंदुओं को लगता है कि सारे मुसलमान आतंकवादी और गोहत्या करने वाले हैं।

छेड़खानी का रास्ता

मनचलों की छींटाकशी से तंग आकर लड़कियों ने अपने गांव में ही बारहवीं तक स्कूल खोलने की मांग की और अनशन पर बैठ गर्इं।...

विविधता की रक्षा

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस बार का विषय था- सतत् जैव विविधता और पर्यटन।

मुसलमान रामभूमि बाबरी मस्जिद के विवाद को खत्म कर नई इबादत लिखने को तैयार

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के विवाद को मुसलिम धर्मगुरुओं ने खत्म करने और बाबर के आक्रांता होने को स्वीकार करके राम मंदिर निर्माण...

पता होना चाहिए कि धर्मगुरु को क्या करना चाहिए और क्या नहीं

धर्म इस देश का सबसे संवेदनशील मसला है। इससे जुड़ी हर चीज संवेदनशील है, यानी इसे मानने वाले, इसके मसले और मुखिया भी।

चौपालः जीवन के अंग

कई बार इंटरनेट पर और अखबार में खबर पढ़ने को मिलता है कि एक व्यक्ति के अंगदान करने से कई लोगों को नई जिंदगी...

चौपालः स्त्री का हक

किसी सभ्य समाज में मान-मर्यादा, प्रतिष्ठा, शालीनता के साथ किसी स्त्री-पुरुष का रिश्ते में रहना स्वाभाविक है।

चौपालः वायरस का वार

सोलह मई को रैंसमवेयर वायरस के जरिए दुनिया भर में हुआ साइबर हमला हमारे देश की जनता, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और सरकार के लिए...

चौपाल: आधार कार्ड के दुरुपयोग

आधार कार्ड के दुरुपयोग के भी उदाहरण सामने आ चुके हैं।

विकास की मरीचिका

कोई हिंदू और कोई मुसलिम नहीं होता। दो जून की रोटी ही उनका धर्म और मजहब होती है।

अगर सच्चाई की जीत होती तो फिर नादिरशाह, तैमूर लंग और चंगेज खान कैसे जीते?

भीड़ अगर साथ देती तो माइकल सर्वेंट्स, गिओदार्नो ब्रूनो, सर थॉमस मोर और एन्तोइन लारेंट लैवोजिए को कोई कैसे मार सकता था!

भरोसे की डोर

मोदी सरकार तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में नौ सौ प्रमुख स्थानों पर बड़े-बड़े आयोजन करने की तैयारी में है।

अगर शरीयत इतनी ही मंजूर है तो चोरों के हाथ क्यों नहीं काटते?

मुसलिम समाज के अंदर ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने तीन तलाक को खत्म करने के लिए मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा है।

पुनर्विचार की दरकार

सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उस नक्सली को वित्तीय सहायता के रूप में तुरंत पंद्रह लाख रुपए का चेक देते हुए पांच लाख...

कहां है जन लोकपाल

सवाल है कि दिल्ली का वह जन लोकपाल कहां है जो यदि होता तो स्वयं सारे मामले संभालता और जिसकी माला जप-जप कर आम...

एक साथ चुनाव

जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में सरकार के 3426 करोड़ खर्च हुए, वहीं राजनीतिक दलों ने इसी चुनाव में लगभग 26000 करोड़ खर्च किए।...

चौपालः न्याय का सवाल

सर्वोच्च न्यायालय ने जस्टिस कर्णन के मामले में एक के बाद एक जिस तरह के कदम उठाए हैं वे न तो न्यायोचित प्रतीत होते...

सबरंग